Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University

Department of Philosophy


राष्ट्र के दार्शनिक मानचित्र पर विशिष्ट स्थान रखने वाले दर्शनशास्त्र विभाग की स्थापना 1958 में हुई थी। प्रारम्भ में दर्शनशास्त्र विभाग एक सहविभाग के रुप में कार्य करना आरम्भ किया थ। जनवरी 1973 में दर्शनशास्त्र विभाग प्रशासनिक द़ष्टि से भी स्वतन्त्र हो गया। विभाग में उत्क़ष्ट शैक्षिणिक उत्क़ष्टता के कारण दर्शनशास्त्र विषय छात्रों में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ और अस्तित्ववाद, संव़त्तिवाद एवं वेदान्त दर्शन में शोध कार्य तथा रचनाओं के कारण विभाग अन्तर्राष्ट्रीय दार्शनिक गतिविधियों का केन्द्र बन गया।  

    उच्चस्तरीय शिक्षा के प्रति निरन्तर सचेष्ट रहते हुए विभागीय सदस्यों को अपने इस उत्तरदायित्व का भी बोध है कि दर्शनशास्त्र को सामाजिक य्प से प्रासंगिक एवं कल्याणकारी अनुशासन बनाया जाना चाहिये। अपने इसी उत्तरदायित्व का निर्वाह करने के लिय विभाग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से विभाग में योग अध्ययन एवं अभ्यास केन्द्र की स्थापना की। इस केन्द्र में परास्नातक योग डिप्लोमा की शिक्षा दी जाती है। इसके अतिरिक्त नगर के आमजनों के लिये भी अभ्यास कक्षाओं की व्यवस्था है। ये दोनों कार्यक्रम छात्रों और सामान्य जन में अत्यन्त लोकप्रिय है। विभाग ने कई राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार संगोष्ठियों एवं व्याख्यानों का आयोजन किया है। विभाग में अब तक कई छात्र कनिष्ठ शोध अध्येता के रुप में कार्य कर चुके है।

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम हिस्ट्री ऑफ इण्डियन फीलासफी, एथिक्स, सौन्दर्यशास्त्र, प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र कान्टेम्पोरेरी वेस्टर्न फीलासफी, मार्डन इण्डियन थाट, फीलासफी ऑफ शंकराचार्य, फीलासफी आफ काण्ट, फीलासफी आफ ब्रैडले एवं फीलासफी आफ श्री अरविन्द। स्नातकोत्तर योग डिप्लोमा - दर्शनशास्त्र विभाग में संचलित इस पाठ़यक्रम में स्नातकोत्तर कक्षाओं के नियमित छात्र ही प्रवेश ले सकते हैं। प्रवेश श्रेष्ठता सूची के आधार पर होता है।

 

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