Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University

Department of Agriculture


भारत एक कृषि प्रधान देश है। विगत पचास वर्षो से आर्थिक नियोजन से यद्यपि‍ कृषि में परिवर्तन हुये है तथापि भारत के आर्थिक सामाजिक और सांस्‍क़तिक जीवन में कृषि का महत्‍व बना हुआ है। राष्‍ट्रीय आय के उत्‍पादन, रोजगार, जीवन यापन के साधन, औद्यौगिक विकास, अन्‍तर्राष्टिय व्‍यापार आदि सभी पहलुओं से कृषि भारत का सबसे महत्‍वपूर्ण व्‍यवसाय है। नयी सहस्‍त्राब्‍दी में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान की महत्‍ता वैश्‍वीकरण की दृष्टि से उत्‍तरोत्‍तर बढने लगी है और समस्‍त विश्‍व एक वैश्विक गॉव (ग्‍लोबल विलेज) का स्‍वरुप ग्रहण करने के लिये संकल्पित है। इस दिशा में कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालयों, अनुसन्‍धान संस्‍थानों तथ कृषि शिक्षण संस्‍थानों को ऐसी भूमिका सुनिश्‍चत करनी है कि हमारा देश वैश्‍वीकरण की धारा से निरन्‍तर जुडा रहे।

प्रारम्‍भ में गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में कृ‍षि संकाय की स्‍थापना कतिपय कारणों से नहीं हो सकी, किन्‍तु विभिन्‍न जनपदों के सम्‍बद्व महाविद्यालयों में स्‍नातक कृषि एवं कुछ महाविद्यालयों में स्‍नातकोत्‍तर कृषि विषयों में पठन-पाठन चलता रहा। इसके साथ ही कुछ कृषि महाविद्यालयों में अनुसंधान की दिशा में भी गम्‍भीर प्रयास किये गये। वर्तमान में मात्र तीन महाविद्यालय, नेशनल स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय बडहलगंज,  बाबा राघव दास स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, देवरिया तथा चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय, पदमापुर, पांडवनगर, बस्‍ती ही इस विश्‍वविद्यालय के कृषि संकाय हैं।

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